कुछ
कपटी लोग, और अज्ञानी लोग यह स्वीकार ही नहीं करते कि शूद्र जन्म से ही
शूद्र होता था, वह कभी कहते है कि यह जाती पति मुगलों कि देन है, कभी कहते
है अंग्रेजो कि देन है। कभी कहते है पुरातन समय में काम धंधा चुनने की पूरी
आज़ादी थी और काम धंधे के आधार पर ही जाती का निर्धारण होता था। जब उनको
कोई सबूत (लिखित प्रमाण) दिखा दो तो कहेंगे कि यह तो अंग्रेजो ने मिलावट कर
दी।
निम्न पोस्ट किया गया महाभारत का पन्ना गीता प्रेस गोरखपुर
द्वारा प्रकाशित महाभारत से लिया गया है जिसमें कृष्ण को गांधारी से कहते
हुए दिखाया गया है:-
ब्राह्मणी तप के लिए, गाय बोझ ढोने के लिए,
घोड़ी तेज दौड़ने की सवारी के लिए वैश्य कन्या पशु पालन के लिए, शूद्र
स्त्री सेवा के लिए और तुम जैसी क्षत्रिय औरत युद्ध में मरे जाने के लिए ही
पुत्र पैदा करती है।
काम धंधा तो जनम से पहले ही निर्धारित कर दिया
कृष्ण ने। यही मनुस्मृति में लिखा है कि बाहरवें दिन नवजात बच्चे का
नामकरण संस्कार जाती के आधार पर ही हो जाएगा। शूद्र बच्चे का नाम दास्युक्त
होगा।
जिन लोगो ने प्रतिवाद करना हो पहले महाभारत का यह पन्ना पढ़े, अपनी घर रखी महाभारत को पढ़े या डाउनलोड करके भी पढ़ सकते है।
Comments
Post a Comment