शंबुक
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मोदी के शासन में हिन्दू हिन्दू बहुत होने लगा है। जो 10 वी कक्षा 33% नंबर लेकर पास हुए वह अपने आप को महांज्ञानी समझने लग गए।
रामायण
में जब भी ऋषि शंबुक की श्री राम द्वारा हत्या का जब भी कोई जिक्र करता है
तो वह चिल्लाते है की यह झूठ है। सच्चाई तो यह है कि रामायण तो कोई पड़ता
या समझता नहीं।( मैं भी नहीं पड़ता क्योंकि मुझे पता है कि पढ़ने से कुछ
प्राप्त होने वाला नहीं, इसमें कुछ ज्ञान की बात नहीं)
बाल्मीकि रामायण
के सुंदर काण्ड में 73 से 76 उपसर्ग में इस कहानी का वर्णन है। जिस में
किसी ब्राह्मण के बालक की मृत्यु इसलिए होना बताया गया है कि कोई शूद्र
तपस्या करता है तब ऐसा होता है जबकि शूद्र का धर्म तो बाकी के तीन वर्णों
की सेवा करना है। श्री राम बहुत मेहनत से उस शम्बुक को ढूंढ कर तलवार से
उसका सिर काट देते है जिस देवता खुश हो कर श्री राम पर पुष्प वर्षा करते
है।
एक ब्राह्मण दोस्त ने तो यह पोस्ट डाल दी कि जाती व्यवस्था
मुगलों कि देन है। फिर एक और वीडियो डाल दी कि सावरकर तो जाती व्यवस्था
ख़तम करना चाहते थे परन्तु गांधी ऐसा नहीं चाहते थे। अब कोई उससे पूछे कि
गांधी क्या चाहता था क्या नहीं तुम खुद ही जाती व्यवस्था दूर कर दो ना।
ब्राह्मणों और दलितों के रिश्ते कायम करवा कर। इन्हीं ब्राह्मणों का धर्म
खतरे आ जाता है जब साक्षी और अजितेश के प्रेम विवाह की खबर उड़ती है।
दूर तो बाद ने करना पहले यह तो स्वीकार करो कि हमारे श्री राम ही इस जाती व्यवस्था अपनाने के है नहीं बल्कि हत्या के भी अपराधी है।
अब यह पढ़ने के बाद मैं कैसे बोलूं और क्यों बोलु " जय श्री राम" ?
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